Janmashtami 2023Janmashtami 2023

जन्माष्टमी के दिन भक्त भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। इस दिन आधी रात को भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था और इसे बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जो लोग जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं उन्हें पूजा के नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि आप जन्माष्टमी व्रत के नियमों का पालन नहीं करते हैं तो आपका व्रत अधूरा रह सकता है और आपको आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है। इस साल जन्माष्टमी का महापर्व आज और कल दो दिन मनाया जा रहा है. पुरी स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बता रहे हैं जन्माष्टमी व्रत और पूजा के नियम।

जन्माष्टमी व्रत और पूजा के नियम: –

Janmashtami 2023
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1.जन्माष्टमी के दिन पूजा में खीरे का प्रयोग किया जाता है। भगवान श्री कृष्ण की शिशु मूर्ति को खीरे में रखा जाता है। इसके बाद रात 12 बजे मूर्ति को बाहर निकाला जाता है और जन्म उत्सव मनाया जाता है. इस दिन भक्तों को पीले वस्त्र पहनने चाहिए।

2.भगवान श्री कृष्ण का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण को शंख में पंचामृत डालकर स्नान कराना शुभ माना जाता है।

3.जन्माष्टमी के दिन, लड्डू गोपाल जी के जन्म के बाद, उन्हें मोर पंख, बांसुरी, काजल, चंदन का लेप, माला, मुकुट, वस्त्र और अन्य सामान से सजाएं।

4.लड्डू गोपाल जी के लिए पालना स्थापित करें और उनका झूला सजाएं। सुनिश्चित करें कि उनके आरामदायक झूले के लिए व्यवस्था की गई है।

5.लड्डू गोपाल को खीर, मक्खन, मिश्री, दूध से बनी मिठाइयाँ और पंजीरी जैसी स्वादिष्ट मिठाइयाँ अर्पित करें, प्रसाद में तुलसी के पत्ते अवश्य शामिल करें। इससे भगवान श्री कृष्ण अत्यंत प्रसन्न होंगे।

जन्माष्टमी पर कुछ ऐसी चीजें न करें:

1.जन्माष्टमी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचें। तुलसी को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाना अशुभ माना जाता है क्योंकि तुलसी में देवी लक्ष्मी का वास माना जाता है। अपने कार्यों से देवी लक्ष्मी को नाराज करने से आपके धन, सुख और समृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

2.जन्माष्टमी के दिन काले रंग के कपड़े पहनने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इसका प्रयोग करने से बचें क्योंकि यह शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है

3.महिलाओं को अपने बालों को खुला न छोड़ने की सलाह दी जाती है। उन्हें अपने बालों को बांधकर रखना चाहिए।

4.भगवान श्रीकृष्ण को गोपाल भी कहा जाता है और उनका गाय से प्रेम था, क्योंकि गाय में देवों का वास होता है। इसलिए जन्माष्टमी को गोवंश को प्रताड़ित नहीं करना चाहिए। गोसेवा करने से सुख और समृद्धि बढ़ सकती है।

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